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(इश्क़ से ग़ज़ल तक) शेर-ओ-शायरी,ग़ज़ल संग्रह,गीत वैभव बेख़बर

बस्तियों  के,   ग़रीब   घर  देखे खौफ़  खाए   हुए    बशर  देखे चार  दाने  को, चार   आने  को ज़िन्दगी  रोज़    दर-बदर   देखे तख़्त    पाए   अमीर   लोगों  ने मात   खाए    हुए    हुनर   देखे किसका  है   इंतिज़ार   वर्षों  से एक  सूनी    सड़क  नज़र  देखे छाँव    में    देखा  आसमानों को धूप   आई  तो फ़िर   शज़र देखे नाज़ उनको  है अपनी कश्ती पर हमनें   डूबे   हुए    शिखर   देखे लोग    भटके  शरीफ़,   राहों  में रहज़नी   करते     राहबर    देखे। 0 भाई-बंधु     रिश्ते-नाते     यार   सब मतलबी  से   हो गए    किरदार  सब मशविरे तक   मुफ़्त में...