हिंदी साहित्य लेख ( वैभव बेख़बर)
साहित्य प्रेमियों को मेरा नमस्कार साहित्य क्या है उसका जीवन मे क्या महत्व है, क्या साहित्य बुर्जुआ वर्ग के आनंद का साधन है, या सर्वहारा वर्ग के संघर्ष की अभिव्यक्ति या फिर बाबू गुलाब राय की तरह गेंहूँ और गुलाब में सामंजस्य बनाये रखने की उक्ति है कि जब-जब यह सामंजस्य बिगड़ेगा, समाज में घातक संघर्ष उत्पन्न होंगे, या फिर साहित्य को क्या होना चाहिये, जब आप साहित्य का इतिहास पढ़ोगे तो पाओगे कि साहित्य में समाज की अभिव्यक्ति होती आ रही है बस किसी काल में कम ,किसी मे ज़्यादा, मैंने ब्रिटिश काल का इतिहास पढ़ा है,अंग्रेजी हुक़ूमत के तख़्त को झकझोरता हुआ साहित्य, तमाम लेखकों की किताबें ज़ब्त हुई,पत्र-पत्रिकायें बंद करवा दी गयीं, आजाद भारत में क्या हुआ क्या हम गेँहू और गुलाब का सामंजस्य बराबर स्थापित रख सके पंडित राहुल संकृत्यायन ने कहा था " भारत में बौध्द साहित्य का लोप हो जाने से यहाँ कूपमंडूकता का बोल-बाला हो गया " यहाँ मैं बच्चन सिंह जी का एक कथन याद दिलाना चाहता हूँ "जिन लोंगों को हिंदी साहित्य में रामचंद्र शुक्ल के अलावा कुछ नहीं दिखाई देता वे अपनी आँखों का...