बोधगया बुध्दमय स्थल
*वेदों* में उपलब्ध
हिंसक यज्ञ, कर्मकांड, बलि प्रथा के विरोध में *उपनिषद* खड़े हुये थे,
उपनिषद हमनें स्वीकार कर लिए,
सदियों बाद फिर से
*ब्रह्म समाज , (राजाराम मोहनराय)*
मूर्ति पूजा, बाल विवाह, विधवा विवाह , सती प्रथा के विरोध में खड़ा हुआ ,और उसे हमनें स्वीकार कर लिया
*आर्य समाज,(दयानंद सरस्वती)*
मूर्ति पूजा विरोध, पाखंड ,धर्मिक कुरीतियों के विरोध में खड़ा था और हमनें स्वीकार कर लिया
*प्रार्थना समाज (आत्माराम पांडुरंग)*
धार्मिक और सामाजिक सुधार जातिवाद उन्मूलन का आंदोलन खड़ा हुआ, और हमनें स्वीकार कर लिया,
*अहिंसा और सत्याग्रह (गांधी जी)*
अस्पृश्यता उन्मूलन, जातिवाद ,अहिंसा ,सत्याग्रह, सामाजिक सुधार आंदोलन हुये, हमनें स्वीकार कर लिये/
*रामकृष्ण मिशन (विवेकानंद)*
पाखण्डवाद विरोधी,समाजसुधारक कार्य किये, और हमनें स्वीकार कर लिया,
उपर्युक्त सभी में वैदिक धर्म में हस्तक्षेप किये, और सुधारात्मक प्रयास किये और हमनें स्वीकार कर लिये,
*और एक #तथागत बुद्ध*
हमें क्यों नहीं स्वीकार है.......?
वेदिक धर्म से कोई हस्तक्षेप नहीं
अपना स्वंय का मार्ग तय किया, भारत से निकलकर दुनिया के तमाम देशों तक गये, बिना किसी भेदभाव, पाखण्ड, कुरीति, तानाशाही के,
एक जमाना था की सम्पूर्ण एशिया बुध्दमय हो गया, दुनिया से #तथागत_बुद्द को लाइट ऑफ एशिया कहा ,
उनका प्रभाव इस कदर हुआ कि वैदिक धर्म ने उनका अपना वारिस/वंशज बताने की कोशिश तक कर डाली
विष्णु का नववाँ अवतार तक घोषित कर दिया !
उच्च भारतीय बिजनेसमैन दुनिया मे कहीं भी जाते हैं और कहते हैं
I come from land of Budda
हाल ही में मोदी जी भी विदेशों में जाकर बताते हैं
मैं महात्मा बुद्ध की धरती से आया हूँ, वो इसलिए कि दुनिया बुद्द की कर्जदार है,
वर्तमान में अपने अस्तित्व को बचाता हुआ #बोधगया
*वैभव बेख़बर*
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