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2023 वैभव बेख़बर 60 gazal ग़ज़ल संग्रह

 कहीं  फनकार  दौलत के  कहीं  किरदार दौलत  के बचे  हैं  जो   कहानी  में    सभी   दीदार  दौलत  के, कहीं  से  ढूंढ़  लाओ   चंद  चारा-साज़   उल्फ़त  के जमीं  पर  अब  नज़र आते  हैं सब बीमार  दौलत के, के  जिसके  पास  है  दौलत   वही  राजा  बनेगा अब हुक़ूमत  के  लिए  सजते  हैं  अब  दरबार  दौलत  के, अभी  तक  नस्लवादी ,  मस्लहत के   द्वंद  ज़िंदा   हैं उठा  रख्खें  हैं  दुनियाँ  नें   नये    मेयार   दौलत  के, भले  इंसान को  कोई   यहाँ  सोहबत  नहीं   मिलती यहाँ  इकरार  दौलत  के  सभी  इनकार  दौलत  के, अदब का  फ़न  लिए  बैठे हैं  हम  बस्ती  में  वर्षों  से मगर  बाज़...