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कवितायें

 हाल समझना सीखो, हर चाल समझना सीखो,  नकाब को पहचानो,    इसलिए  किताब पढ़ो ! पूँजीपतियों  से  मिलकर,  देश का पैसा खाते  हैं जाति-धर्म  के  नाम पर   हमको  जो लड़वाते हैं, वक्त बदलता रहता, इस दुनिया में  मैयार का रंग,  तुमको लड़नी पढ़ेगी,अपने हक अधिकार की जंग, ज्ञात हो  पहले  तुमको, क्या सच है  क्या  है  झूठ अज़ाब  के  कारण जानों, इसलिए  क़िताब  पढ़ो ! अनमोल  स्वस्थ  शरीर,   मत करना  इसे  ख़राब घर  की  हालत  देखो , जिसने-जिसने  पी शराब, मेहनतकश  मेहनत करके,  जीवन  में रंग भरते हैं लक्ष्य उन्हें होता हासिल, नित्य  क़दम जो बढ़ते हैं , हर हार का अंजाम भी,   देता  है  उम्दा  पैग़ाम क़िताब की ताक़त जानों,  इसलिए  क़िताब पढ़ो ! 0 पास  तो  आ  गये  हैं  मगर हम  नहीं  हैं  तुम्हारे  लिये! हम को  दाना  चुगाना पसँद तुम को मछली है खा...